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Punjab Once Again on Verge of Destruction – Yogender Yadav.

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Yogender Yadav for is weekly article to Inqilab exclusively in Urdu Media printed on Sunday 31st of Oct 2015. A must read and must share.

पंजाब किसी झूठे सौदे में न फंस जाये

— योगेन्द्र यादव

जब पंजाब जल रहा था तब हुक्मरान जुमले गढ़ रहे थे| हो सकता है कि “जब रोम जल रहा था तब नीरो बांसुरी बजा रहा था” वाली उक्ति की तरह भविष्य में पंजाब की अकाली-बीजेपी सरकार के बारे में भी ऐसे ही मुहावरे चल निकलें|

कई महीनों से सुलगने के बाद पिछले एक महीने से पंजाब का ज्वालामुखी फूट गया है और उसका लावा सडकों पर आ गया है| पहले कपास की फसल बर्बाद होने से दुखी किसानो ने सड़कें और रेल लाइन जाम कर दीं| यह आन्दोलन अभी थमा भी नहीं था कि गुरुग्रन्थ साहिब की बेअदबी के सवाल पर गाँव-गाँव में लोगो ने सड़कें जाम कर दीं| सत्ता ने जवाब पुलिस की गोली से दिया जिससे दो लोग शहीद हो गए| उनकी अंतिम रस्म “भोग” पर पंजाब भर से लोग उमड़े और वहां नोटिस लगा दिया कि यहाँ अकालियों और पुलिस का प्रवेश निषेध है| विरोध में मुख्यतः पंजाब का सिख समाज है, हालाँकि इसमें सिख-हिन्दू तनाव की परछाई भी नहीं है|

बाहर से देखने पर लोग हैरान होते हैं कि पवित्र ग्रन्थ की बेअदबी के मुद्दे पर इतना बवाल क्यों मचा है| बेशक मामला धार्मिक भावनाओं का है, लेकिन पंजाब के किसान केवल धर्म के नाम पर बह जाने वाले नहीं हैं| पंजाब में किसान मजदूर के जमीनी आंदोलनों की लंबी परंपरा है| यूं भी आज कम से कम सिखों के लिए उस तरह के संगीन हालत नहीं हैं जैसे १९८४ के कत्लेआम के बाद या मिलिटेंसी के दौर में थे| फिर पंजाब के सिख सड़कों पर क्यों हैं?

इस सवाल का जवाब देने के लिए हुक्मरानों ने “विदेशी हाथ” का पुराना जुमला उछाला है| एक ही दिन सभी अख़बारों में “विश्वसनीय सूत्रों” के हवाले से खबर छपी कि पंजाब के जन उभार के पीछे पकिस्तान की ख़ुफ़िया एजेंसी आई.एस.आई. का हाथ होने के सबूत मिल गए हैं| जाहिर है, खबर सरकार ने लगवाई थी| पहली नज़र में बात हास्यास्पद लगती है| बेशक आई.एस.आई. की कोशिश रही है कि पंजाब में खालिस्तान के नाम पर आग लगायी जा सके| सुनते हैं इसी तरह हमारी ख़ुफ़िया एजेंसी रॉ भी बलोचिस्तान में खुराफात करती रहती है| लेकिन न तो रॉ अपने दम पर बलोचिस्तान में आग लगवा सकती है, न आई.एस.आई. पंजाब के लाखों लोगो को सड़क पर उतार सकती है| अगर आई.एस.आई. की इतनी ताकत होती तो पिछले पच्चीस सालों से खालिस्तान आन्दोलन को जिन्दा क्यों नहीं कर सकी?सच ये है कि कल के मिलिटेंट (खाड़कू) आज खालिस्तान की लडाई में नहीं बल्कि इस देश के अन्दर आत्मसम्मान और खुशहाली के लडाई में जुटना चाहते है|

पंजाब के हालात के लिए किसी विदेशी हाथ को जिम्मेवार बताना पंजाब की जनता का अपमान है| आज उनका गला कोई विदेशी नहीं देशी हुक्मरानों के हाथों घुट रहा है। इस देशी हाथ के पंजे में पांच उंगलिया हैं – अकाली-बीजेपी सरकार, गुरुद्वारा प्रबंधन की सत्ता, “सच्चा सौदा” डेरे जैसे धर्म के व्यापारी, केंद्र सरकार का अल्पसंख्यक विरोधी तेवर और खेती-किसानी के खिलाफ खड़ा आर्थिक तंत्र| आज पंजाब का विस्फोट इस राजनैतिक-सामाजिक-धार्मिक-आर्थिक सत्ता के खिलाफ विद्रोह है|

इस गुस्से का सबसे सीधा निशाना बादल सरकार है| आज यह सरकार पंजाब में भ्रष्टाचार, जोर-जबरदस्ती, धक्केशाही और असंवेदनशीलता का पर्याय बन चुकी है| नीचे से ऊपर तक रिश्वतखोरी, केबल टीवी से लेकर प्राइवेट बसों तक पर कब्ज़ा, रेत के अवैध खनन से लेकर ड्रग्स के व्यापार तक – पंजाब के लोग हर कुकर्म के लिए इस सरकार को दोषी ठहराते हैं और अब बस एक-एक दिन गिन रहे हैं कि इस सरकार से पिंड कैसे छूटे| पिछले कुछ समय में हमारे यहाँ इतनी अलोकप्रिय सरकार की मिसाल ढूंढना मुश्किल होगा|

अब यह गुस्सा इस सरकार के साथ जुडी धार्मिक सत्ता पर भी उतर रहा है| अकाली दल ने सिख धर्मिक सत्ता के संस्थागत केन्द्रों पर कब्ज़ा किया हुआ है| एक अनूठे लोकतान्त्रिक आन्दोलन से पैदा हुई शिरोमणी गुरूद्वारा प्रबंधक कमिटी को पार्टी और परिवार की मिलकियत बना रखा है| इसे बहुत वक्त बर्दाश्त करने के बाद पंजाब के सिख अब इन राजनैतिक मोहरों के खिलाफ भी खड़े हो गए हैं| अकाल तख़्त तक पर सवाल उठाये जा रहे हैं| अकाली दल की राजनैतिक गोटी बैठाने के लिए बाबा राम रहीम को माफ़ करने के विरोध और गुरु ग्रन्थ साहब की बेअदबी का मामला इस धार्मिक-राजनैतिक सत्ता में अविश्वास का प्रतीक है|

डेरों के अनाचार का मामला इससे जुड़ा हुआ है| हरियाणा में सिरसा स्थित “डेरा सच्चा सौदा” के प्रमुख बाबा राम रहीम इसके प्रतीक के रूप में सामने आये हैं| पिछले कुछ सालो में इस डेरे ने एक विशाल साम्राज्य बना रखा है| इसके प्रमुख के खिलाफ हत्या से लेकर यौनाचार तक के मुक़दमे लंबित हैं, लेकिन किसी पार्टी कि हिम्मत नहीं कि इस बारे में खुल कर बोल सके| हरियाणा चुनाव में बीजेपी तो खुलकर डेरे के समर्थन से जीती थी, अब अकाली भी उनसे हाथ मिलाने के फिराक में है| सिख संगत उन्हें सिख धर्म के प्रतीकों का माखौल उड़ाने वाले व्यक्ति के रूप में याद करती है और माफ़ करने को तैयार नहीं है|

मोदी सरकार का अल्पसंख्यक विरोधी चेहरा बेशक पंजाब का सबसे ज्वलंत सवाल नहीं है| आर.एस.एस. से लेकर बीजेपी तक ने अपने अल्पसंख्यक विरोधी वारों से सिख समुदाय को बाहर रखा है|फिर भी अटाली से लेकर दादरी तक की घटनाओं पर सिख समुदाय की नज़र है| हिन्दू राष्ट्र के शंखनाद से घुटन भी कहीं न कहीं इस विस्फोट के पीछे है|

इस परिस्थिति की जड़ में पंजाब की आर्थिक व्यवस्था भी है| हरित क्रांति ठहराव के बिंदु पर आ चुकी है, उद्योग पंजाब से पलायन कर रहे हैं, रोजगार की तलाश में नौजवान देश से पलायन कर रहे है| किसानी घाटे का धंधा बन गयी है, किसान एक मौसमी मार या कीड़े के हमले को झेल नहीं सकता| पंजाब का किसान अपने आप को एक अंधी सुरंग में बंद महसूस कर रहा है|

आज पंजाब को इस पांच उँगलियों वाले पंजे से मुक्ति की तलाश है| उसे ये तो पता है कि वह किसके खिलाफ है, लेकिन ये नहीं पता कि किसके साथ जाये| आज पंजाब को एक नए हीरो की तलाश है| वे अपने हीरो बना रहे हैं, और बेताबी में उनके खिलाफ कुछ भी सुनने को भी तैयार नहीं हैं| अगर ऐसे में कोई सच्चा विकल्प नहीं उभरता तो डर ये है कि पंजाब किसी झूठे सौदे में न फंस जाये|

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This entry was posted on November 2, 2015 by in Uncategorized and tagged , , .

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