Adil Mohammed's Blog since 2009

Let us make the space we share better and bring the change we desire. Author is Indian Muslim, a Public Figure, Social Activist, Blogger and Media Personality. On mission to build a givers world rather than takers.

Swaraj Abhiyan Demands “Take back amendments from Land Acquistion Bill – Bring Minimum Income Act for Farmers”

11254499_1602006123402421_4572638750826553570_nPress Note, June 10
 
Take back the amendments and bring a Minimum Income Act for Farmers – Swaraj Abhiyan demands

Swaraj Abhiyan has submitted its suggestions to Shri S S Ahluwalia, Chairman, Joint Parliamentary Committee on the Right to Fair Compensation and Transparency in Land Acquisition, Rehabilitation and Resettlement (Amendment) Second Bill, 2015. Please find enclosed our representation to the committee with specific suggestions and demands.

Swaraj Abhiyan has demanded that the section 10A of the new bill, which creates five big exemptions and a bypass wider than the main route itself be taken back. The amendment tries to do away with the consent clause and social impact assessment. Apart from that, Swaraj Abhiyan is opposed to the amendments brought through the central government’s ordinance except for the clause which brings 13 central government acts under the purview of the Land Acquisition Act.
Swaraj Abhiyan has also demanded that the rural multiplication factor in calculation of compensation for land acquisition be fixed at 2 and not left at the discretion of state governments, who have been cheating the farmers in the name of compensation. The core issue and reason for the plight of farmers is the fact that farming as a profession is not profitable. Swaraj Abhiyan has resolved to fight for a Minimum Income Act for Farmers.
Coming June 13, Swaraj Abhiyan will kick-start the nationwide “Jai-Kisan Movement” with an objective to become a strong voice of farmers in fighting for these demands. A mass-contact program is scheduled to begin on June 13, where Abhiyan volunteers will reach out to the farmers from every corner of the country. In the month of August, during the monsoon session, farmers will march towards the parliament with the pots of soil from their villages. The march will start from Punjab and culminate in Delhi on the 10th of August.
Swaraj Abhiyan Media
प्रेस विज्ञप्ति, जून 10
 
भूमि-अधिग्रहण बिल पर संयुक्त संसदीय समिती को स्वराज-अभियान का ज्ञापन
स्वराज अभियान ने भूमि अधिग्रहण का उचित मुआवजा व पारदर्शिता का अधिकार, पुनर्वास व पुन: स्थापना (संशोधन) दूसरा बिल 2015 के सम्बन्ध में बनी सयुंक्त संसदीय समिति को इस बिल के बारे में अपनी राय देते हुए एक ज्ञापन भेजा है। ज्ञापन में कहा गया है कि यह बिल, 2013 के मूल क़ानून के ध्येय परामर्श, सहभागिता, सूचना व पारदर्शिता के खिलाफ है। सरकार के इन संशोधनों के बाद भारतीय संविधान की आत्मा “प्रजातंत्र को जमीनी स्तर तक ले जाने” के संकल्प को प्राप्त नहीं किया जा सकेगा।
स्वराज अभियान ने इस संशोधन बिल को वापिस लेने की मांग करते हुए कहा है कि भूमि अधिग्रहण कानून 2013 के प्रावधानों,  दीवानी अदालत में जाने से रोकने व मुआवजा तय करने में फेक्टर लागू करने, को बदला जाये, जो व्यवहार में आने के बाद जन हित के खिलाफ साबित हुए हैं। स्वराज अभियान ने मांग की है कि कानून कि दीवानी अदालत में जाने की छूट दी जाये वहीँ मुआवजा तय करने के लिए ग्रामीण क्षेत्र में जमीन के बाजार भाव पर लगाए जाने वाले फेक्टर को राज्य सरकारों पर छोड़ने कि बजाय फेक्टर दो लागू करने का प्रावधान किया जाये। हरियाणा जैसे राज्यों ने ग्रामीण क्षेत्र की जमीन के लिए पूरे राज्य के लिए फेक्टर एक को लागू करने का नियम बना दिया है। जिसके चलते अधिग्रहण के एवज में चार गुना मुआवजा मिलने का अधिकार परोक्ष तरीके से ख़त्म कर दिया गया है।
स्वराज अभियान ने ज्ञापन में कहा है कि 2013 का कानून एक जनवरी 2014 से लागू किया गया, जिसके नियम अगस्त 2014 में बनाये गए। दिसंबर 2014 से ही 2013 के भूमि अधिग्रहण के मूल कानून को बदलने की कोशिश चल रही है, जिसका अर्थ है कि बिना प्रयोग में लाये ही छिपे उदेश्यों के लिए कानून को बदलने का प्रयास किया जा रहा है।
स्वराज अभियान ने कहा है कि कुछ विशेष लोगों को टेक्स के मामले में फायदा पहुंचाने के लिए प्राइवेट कम्पनी की जगह प्राइवेट एंटिटी को स्थान दिया जा रहा है। अभियान की राय है कि इस बिल के द्वारा, प्राइवेट कम्पनी या प्राइवेट पब्लिक सांझेदारी के प्रोजेक्ट्स के लिए 80 व 70 प्रतिशत लोगों की सहमती व पब्लिक इम्पेक्ट असेसमेंट (जन प्रभाव आंकलन) के प्रावधान को हटाने का प्रस्ताव, प्राइवेट एंटिटी के लिए मनमर्जी से जमीन का अधिग्रहण करने की खुली छूट देने के लिए है। जो फ़ूड स्क्योरिटी के साथ ही सालों से जमीन की लूट के खिलाफ चल रहे आन्दोलनों की भावना के खिलाफ है।
2013 के भूमि अधिग्रहण कानून में संशोधन का यह बिल मूल क़ानून के प्रावधानों को लागू किये जाने में छूट के लिए पांच अपवाद का प्रावधान करता है।  जिसके चलते लगभग अधिग्रहण की जाने वाली सारी जमीन छूट के दायरे में आ जाएगी। जिससे हम 1894 के कानून से भी पीछे चले जायेंगें।
स्वराज अभियान की राय है कि उक्त संशोधनों के प्रस्ताव करने वाले बिल को वापिस लिया जाये क्योंकि यह बिल 2013 के कानून के अनुसार यदि किसी जमीन का अधिग्रहण कानून लागू होने से पहले हुआ था, मगर उस जमीन का कब्जा नहीं लिया गया है या मुआवजा नहीं दिया गया है तो मालिक को जमीन  वापिस की जाएगी। इस संशोधन बिल से जमीन मालिकों के इस अधिकार को समाप्त करने का प्रयास हो रहा है। साथ ही किसी प्रोजेक्ट को चालू करने के लिए पांच साल की सीमा को भी यह बिल समाप्त कर रहा है।
स्वराज अभियान ने किसानों के साथ हो रहे जबरन अत्याचार का पुरज़ोर विरोध किया है। साथ ही, देश भर के किसानों के लिए एक न्यूनतम आय कानून की मांग की है ताकि खेती-बाड़ी को घाटा-मुक्त बनाया जा सके।
किसानों की सशक्त आवाज़ बनते हुए स्वराज अभियान अपनी इन मांगों के साथ 13 जून से एक राष्ट्रव्यापी “जय-किसान” आंदोलन करेगी।
………………………………………………………

Leave a Reply

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out / Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out / Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out / Change )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out / Change )

Connecting to %s

Top Clicks

  • None

Catagories

Archives

%d bloggers like this: